Sunday, 20 March 2016

30 क्विंटल की तीन जैन मूर्तियाँ खंडवा पहुंचीं

नवकार नगर में जैनियों का नया मंदिर इतिहास रचेगा, गजरथ महोत्सव भी होगा
खंडवा। दिगंबर जैनियों की आस्था का नया अध्याय नवकार नगर में लिखा जा रहा है। करीब 30 क्विंटल की

संगमरमर की तीन मूर्तियाँ राजस्थान से खंडवा आईं। इन्हें बड़ी क्रेन से मंदिर की वेदी पर बैठाया। अब एक दो

माह में गजरथ महोत्सव जैसा पंचकल्याणक होगा। इसमें देश के बड़े-बड़े संतों के आने की संभावना है।
नवकार नगर का जैन मंदिर जिले का पहला ऐसा मंदिर होगा, जिसमें मान स्तंभ बनाया गया है। यह स्तंभ तीर्थों में

ही अधिकतर होता है। सफेद संगमरमर का मान स्तंभ आकर्षक है। इसे भी राजस्थानी कलाकारों ने बनाया है।

वहीं मुलनायक भगवान की वेदी के पीछे आकर्षक मार्बल का कल्पवृक्ष बनाया गया है जो देश में एक या दो

स्थान पर ही है।
समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि करीब 10 से 12 क्विंटल की एक-एक मूर्ति है। कुल तीन मूर्तियाँ

जयपुर के पास के एक गांव से बनकर आई हैं। इन्हें सावधानी से खंडवा तक लाया गया है। मंदिर की वेदियों पर

इन्हें बड़ी चेन ब्लाक की सहायता से शनिवार को समाजजनों की उपस्थिति में एवं भजनों व णमोकार मंत्र के जाप

के साथ रखा गया। इसमें चार घंटे लगे। दो मूर्तियाँ सफेद व एक काले संगमरमर की हैं। इन्हें कलात्मक दृष्टि से

देखा जाए तो गजब की खूबसूरती साफ झलकती है।
दो सफेद मूर्तियाँ आदिनाथ, नेमीनाथ भगवान की हैं। एक काली मूर्ति मुनिसुव्रत भगवान की है। नवकार नगर के

इस मंदिर को मुनिसुव्रत जैन मंदिर नवकार नगर के नाम से ही जाना जाएगा।
मूर्तियाँ मंदिर में रख तो दी गई हैं, लेकिन इनका पंचकल्याणक बाद में होगा। पंचकल्याणक का मतलब प्राण

प्रतिष्ठा से है। भगवान पहले गर्भ में आते हैं। उसके बाद जन्म फिर तप और ज्ञान के बाद मोक्ष प्राप्त करते हैं।

इन्हीं पाँच प्रक्रियाओं के जीवनचक्र को पंचकल्याण जैन समुदाय में कहा जाता है।
इसके बाद गजरथ महोत्सव की तैयारियाँ होंगी। गजरथ महोत्सव का मतलब मूर्तियों में प्राण समायोजित करना

होता है। पंचकल्याणक महोत्सव में देश के बड़े संत उपस्थित होकर सूर्य मंत्रों के द्वारा पाषाण (संगमरमर) की इन

मूर्तियों को पूजने योग्य बनाया जाएगा। आयोजन की प्रक्रिया पांच दिन चलेगी। इसमें संतों का भव्यतम स्वागत व

हाथी, घोड़े, ऊंट के अलावा अन्य तरह के संसाधन भी जुटाए जाएंगे। शनिवार को मुलनायक मुनिसुव्रत भगवान

का दिन होता है और शनिवार को ही नवकार नगर के आकर्षक भव्य मंदिर में इन मूर्तियों को वेदी पर रखा गया।

इस अवसर पर समाज के ख्यालीलाल सेठी, अशोक पाटनी, मनोहरलाल बडज़ात्या, हुकुमचंद सेठी, पंकज

छाबड़ा, मनीष पाटनी, सुनील जैन, सुभाष सेठी, सुशील गदिया, दीपक सेठी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु

उपस्थित थे।