तहसील
मार्केटिंग में गेहूँ लेकर पहुंचे किसान सुरेश की बारातियों जैसा स्वागत
देख आँखें नम हुईं, तिलक लगाकर माला पहनाकर गुड़-चने खिलाए
खंडवा। गेहूँ की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू हो गई। तहसील मार्केटिंग ने 1525 रुपए प्रतिक्विंटल के भाव से मुहुर्त किया एवं प्रथम दिन 125 क्विंटल गेहूं की खरीदी की गई। किसानों के ट्रेक्टर लेकर पहुंचते ही समिति अध्यक्ष अरूणसिंह मुन्ना ने गुड़ खिलाकर किसानों का मुंह मीठा कराया। यहाँ किसानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं देखकर किसानों की आँखें भी नम हो गईं।
इंदौर रोड स्थित तहसील मार्केटिंग की जीनिंग में गेहूँ की खरीदी शुरू हुई। यहाँ 900 किसानों से उनकी उपज का रजिस्ट्रेशन हुआ है। पहले दिन 20 किसानों का रजिस्ट्रेशन था। सबसे पहले सुबह 10 बजे ही दो ट्रेक्टरों में करीब 65 क्विंटल गेहूँ लेकर पांजरिया के कृषक सुरेश लक्ष्मीनारायण पहुंचे। सुरेश का जीनिंग के गेट पर ही बारातियों की तरह स्वागत देखकर वे दंग रह गए। उनका तिलक लगाकर स्वागत किया गया। गुड़ व चने से मुंह मीठा करवाया गया। इसे शुभ माना जाता है।
मालव शक्ति गेहूँ बोकर मालामाल
वाटर कूलर का ठंडा पानी पीते ही किसान सुरेश की आँखें नम हो गईं। सुरेश ने बताया कि कई साल से वे गेहूँ समर्थन मूल्य पर दे रहे हैं। कई बार मंडियों में मेहनत की उपज लेकर पहुंचे। लेकिन इस तरह का स्वागत पहली बार हुआ है। यह केवल मेरा नहीं सभी मेहनतकश किसानों का सम्मान है। सुरेश ने कहा कि मालव शक्ति गेहूँ बोया था। अच्छी उपज हुई। आज वे तहसील मार्केटिंग में गेहूँ लेकर पहुंचे।
ईमानदार तुलाई, बेहतर व्यवस्थाएं हों
समिति अध्यक्ष अरूणसिंह मुन्ना व उपाध्यक्ष सुनील जैन ने इलेक्ट्रानिक काटे का पूजन किया। नारियल फोड़कर मिठाई भी चढ़ाई। किसानों को किसी तरह परेशानी न हो। इस तरह के समिति अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान को ईमानदार तुलाई के साथ बेहतर व्यवस्थाएं व व्यवहार मिले। उन्हें गुड़, चने के नाश्ते के बाद ठंडा पानी और दोपहर में साथियों सहित भोजन भी कराया गया।
नमी देखने की मशीन आई
प्रदेश भर में समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान कर्मियों व किसानों में बहस होती थी कि गेहूँ गीला है। अब हर सेंटर पर एक नमी जाँचने वाली इलेक्ट्रानिक मशीन दी गई है। मशीन का वजन ही 150 ग्राम है। यह छह इंच ऊंची है। इसमें सौ ग्राम अनाज डालकर बटन दबाई जाती है तो कुछ ही देर में नमी का प्रतिशत आ जाता है। इसी रीडिंग के आधार पर गेहूँ समिति बिना झंझट खरीद लेती है। सरकार ने 12 प्रतिशत से कम नमी वाला गेहूँ खरीदने के निर्देश दिए हैं।
तीन दिन में भुगतान हाथ में
उपाध्यक्ष सुनील जैन ने बताया कि किसानों को सात दिन में चैक देने का प्रावधान है। तहसील मार्केटिंग 3 दिन में किसानों को चैक हाथ में देने की तैयारी में है। तहसील मार्केटिंग अंग्रेजों के जमाने से पहले से किसानों के हित में काम कर रही है। इसकी स्थापना 1938 में हुई। रघुनाथराव मंडलोई पहले अध्यक्ष थे। अब अरूणसिंह मुन्ना इसके अध्यक्ष हैं। पूरनमल शर्मा व ब्रजेंद्रसिंह मौर्य जैसे लोग अध्यक्ष रहे। बाद में जीनिंग प्रेसिंग वर्क होने लगा।
1961 में करोड़ों का अनुदान
1960 के जमाने में खंडवा कपास का किंग माना जाता था। तहसील मार्केंिटंग की बढ़ती साख व किसान हितैशी देखकर उस वक्त की सरकार ने 1961 में डेढ़ लाख रूपए का अनुदान व कई एकड़ भूमि बिना शर्त लीज पर दी थी। उस समय इस राशी की वेल्यू आज के करोड़ों रूपए में होगी।
ज्यादा गेहूँ खरीदी लक्ष्य नहीं
1968 में भवन व समिति का आधुनिकीकरण हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंदनारायण सिंह ने शुभारंभ किया था। वर्तमान में गेहूँ की उपज के दाम खुले बाजार में अच्छे मिल रहे हैं। इस पर तहसील मार्केंिटंग के अध्यक्ष अरूणसिंह का कहना है कि सीएम की मंशा समितियों के ज्यादा गेहूं की खरीदी की नहीं है। किसानों को न्यूनतम दाम 1525 रुपए मिले। यदि कहीं नहीं मिलता तो समितियाँ समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी करती हैं। बस गेहूँ में कचरा व निर्धारित से ज्यादा नमी नहीं होना चाहिए।
गेहूं खरीदी केंद्र के शुभारंभ अवसर पर अध्यक्ष अरूणसिंह मुन्ना, उपाध्यक्ष सुनील जैन, प्रबंधक विनोद श्रीमाली, ओपी अत्रे सहित स्टाफ व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
खंडवा। गेहूँ की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू हो गई। तहसील मार्केटिंग ने 1525 रुपए प्रतिक्विंटल के भाव से मुहुर्त किया एवं प्रथम दिन 125 क्विंटल गेहूं की खरीदी की गई। किसानों के ट्रेक्टर लेकर पहुंचते ही समिति अध्यक्ष अरूणसिंह मुन्ना ने गुड़ खिलाकर किसानों का मुंह मीठा कराया। यहाँ किसानों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं देखकर किसानों की आँखें भी नम हो गईं।
इंदौर रोड स्थित तहसील मार्केटिंग की जीनिंग में गेहूँ की खरीदी शुरू हुई। यहाँ 900 किसानों से उनकी उपज का रजिस्ट्रेशन हुआ है। पहले दिन 20 किसानों का रजिस्ट्रेशन था। सबसे पहले सुबह 10 बजे ही दो ट्रेक्टरों में करीब 65 क्विंटल गेहूँ लेकर पांजरिया के कृषक सुरेश लक्ष्मीनारायण पहुंचे। सुरेश का जीनिंग के गेट पर ही बारातियों की तरह स्वागत देखकर वे दंग रह गए। उनका तिलक लगाकर स्वागत किया गया। गुड़ व चने से मुंह मीठा करवाया गया। इसे शुभ माना जाता है।
मालव शक्ति गेहूँ बोकर मालामाल
वाटर कूलर का ठंडा पानी पीते ही किसान सुरेश की आँखें नम हो गईं। सुरेश ने बताया कि कई साल से वे गेहूँ समर्थन मूल्य पर दे रहे हैं। कई बार मंडियों में मेहनत की उपज लेकर पहुंचे। लेकिन इस तरह का स्वागत पहली बार हुआ है। यह केवल मेरा नहीं सभी मेहनतकश किसानों का सम्मान है। सुरेश ने कहा कि मालव शक्ति गेहूँ बोया था। अच्छी उपज हुई। आज वे तहसील मार्केटिंग में गेहूँ लेकर पहुंचे।
ईमानदार तुलाई, बेहतर व्यवस्थाएं हों
समिति अध्यक्ष अरूणसिंह मुन्ना व उपाध्यक्ष सुनील जैन ने इलेक्ट्रानिक काटे का पूजन किया। नारियल फोड़कर मिठाई भी चढ़ाई। किसानों को किसी तरह परेशानी न हो। इस तरह के समिति अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसान को ईमानदार तुलाई के साथ बेहतर व्यवस्थाएं व व्यवहार मिले। उन्हें गुड़, चने के नाश्ते के बाद ठंडा पानी और दोपहर में साथियों सहित भोजन भी कराया गया।
नमी देखने की मशीन आई
प्रदेश भर में समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान कर्मियों व किसानों में बहस होती थी कि गेहूँ गीला है। अब हर सेंटर पर एक नमी जाँचने वाली इलेक्ट्रानिक मशीन दी गई है। मशीन का वजन ही 150 ग्राम है। यह छह इंच ऊंची है। इसमें सौ ग्राम अनाज डालकर बटन दबाई जाती है तो कुछ ही देर में नमी का प्रतिशत आ जाता है। इसी रीडिंग के आधार पर गेहूँ समिति बिना झंझट खरीद लेती है। सरकार ने 12 प्रतिशत से कम नमी वाला गेहूँ खरीदने के निर्देश दिए हैं।
तीन दिन में भुगतान हाथ में
उपाध्यक्ष सुनील जैन ने बताया कि किसानों को सात दिन में चैक देने का प्रावधान है। तहसील मार्केटिंग 3 दिन में किसानों को चैक हाथ में देने की तैयारी में है। तहसील मार्केटिंग अंग्रेजों के जमाने से पहले से किसानों के हित में काम कर रही है। इसकी स्थापना 1938 में हुई। रघुनाथराव मंडलोई पहले अध्यक्ष थे। अब अरूणसिंह मुन्ना इसके अध्यक्ष हैं। पूरनमल शर्मा व ब्रजेंद्रसिंह मौर्य जैसे लोग अध्यक्ष रहे। बाद में जीनिंग प्रेसिंग वर्क होने लगा।
1961 में करोड़ों का अनुदान
1960 के जमाने में खंडवा कपास का किंग माना जाता था। तहसील मार्केंिटंग की बढ़ती साख व किसान हितैशी देखकर उस वक्त की सरकार ने 1961 में डेढ़ लाख रूपए का अनुदान व कई एकड़ भूमि बिना शर्त लीज पर दी थी। उस समय इस राशी की वेल्यू आज के करोड़ों रूपए में होगी।
ज्यादा गेहूँ खरीदी लक्ष्य नहीं
1968 में भवन व समिति का आधुनिकीकरण हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंदनारायण सिंह ने शुभारंभ किया था। वर्तमान में गेहूँ की उपज के दाम खुले बाजार में अच्छे मिल रहे हैं। इस पर तहसील मार्केंिटंग के अध्यक्ष अरूणसिंह का कहना है कि सीएम की मंशा समितियों के ज्यादा गेहूं की खरीदी की नहीं है। किसानों को न्यूनतम दाम 1525 रुपए मिले। यदि कहीं नहीं मिलता तो समितियाँ समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी करती हैं। बस गेहूँ में कचरा व निर्धारित से ज्यादा नमी नहीं होना चाहिए।
गेहूं खरीदी केंद्र के शुभारंभ अवसर पर अध्यक्ष अरूणसिंह मुन्ना, उपाध्यक्ष सुनील जैन, प्रबंधक विनोद श्रीमाली, ओपी अत्रे सहित स्टाफ व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।