खंडवा। आकुलता ही दुख है और निराकुलता में ही शांति है। अकांक्षाएं ही अशांतिमय है, अकांक्षाओं से इच्छा की पूर्ति नहीं होती अपितु पुण्य से अकांक्षाओं की पूर्ति होती है। परमात्मा किसी की इच्छा की पूर्ति करने नहीं आते हैं, परमात्मा तो मात्र ज्ञाता, दृष्टा रहते हैं। सुख की चाह सभी को है परंतु सुख की प्राप्ति सभी को नहीं होती क्योंकि जो परमेष्टियों के बताए मार्ग पर चलता है उसे ही सुख की प्राप्ति होती है। यह उद्गार मंडल विधान की पूजा के समय पंडित देवेन्द्र जैन ने व्यक्त किए। पंडित जी ने कहा कि धर्म मात्र मनुष्य के लिए नहीं है अपितु प्राणी मात्र के लिए है। मनुष्य के राग में पशुओं का रक्त मत बहाओ, अहिंसा धर्म की चर्चा और चर्या होनी चाहिए। दया, प्रेम मात्र मनुष्यों तक ही सीमित न रहे आपकी दया का दायरा विशाल होना चाहिए। पशु-पक्षी भी तो प्राणी है वह भी जीना चाहते हैं उन्हें भी जीने दो। जियो और जीने दो सूत्र को पहचानो और इस पर ध्यान दो।
प्रवचन देते हुए राजकुमारी जैन ने कहा कि जैन दर्शन विश्व मैत्री की बात करता है परंतु पर कल्याण के लिए संक्लेशता नहीं करता। विश्व में कोई शत्रु है तो वह चिंता है और कोई परम मित्र है तो वह प्रशस्त चिंतन है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि दिगंबर जैन मुमुक्ष मंडल द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी दिल्ली से पधारे पंडित जतीशचंद्र जी शास्त्री के परम सानिध्य एवं निर्देशन में विधानाचार्य अशोक जी व सम्मेद जी के सहयोग से विश्व शांति व सभी के कल्याणार्थ एवं समय पर अच्छी वर्षा के लिए इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजा के साथ ग्रीष्मकाल में समाज के बालक-बालिकाओं को धर्म की शिक्षा एवं जैन धर्म के सिद्धांत देव दर्शन पूजन विधि के लिए पं. संजय सिद्धार्थी, रितेश शास्त्री, दीपक शास्त्री, जितेन्द्र शास्त्री के साथ ही प्रिया संजय जी ने सैकड़ों बच्चों को इन सात दिनों में धर्म का पाठ पढ़ाया। 2 जून गुरूवार को इस महोत्सव का समापन होगा। प्रात: 6.30 से 7 बजे शांति जाप, 7 से 8.30 बजे तक जिनेन्द्र पूजन व अभिषेक एवं शांति यज्ञ के साथ प्रात: 8.30 बजे शहर के विभिन्न मार्गो से श्री जिनेन्द्र रथयात्रा निकाली जाएगी। प्रात: 10 से 11 बजे तक प्रवचन एवं 11 सामुहिक वात्सल्य भोज के साथ इस जैनत्व महाकुंभ का समापन होगा।
-Source @vishaldadaji
प्रवचन देते हुए राजकुमारी जैन ने कहा कि जैन दर्शन विश्व मैत्री की बात करता है परंतु पर कल्याण के लिए संक्लेशता नहीं करता। विश्व में कोई शत्रु है तो वह चिंता है और कोई परम मित्र है तो वह प्रशस्त चिंतन है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि दिगंबर जैन मुमुक्ष मंडल द्वारा प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी दिल्ली से पधारे पंडित जतीशचंद्र जी शास्त्री के परम सानिध्य एवं निर्देशन में विधानाचार्य अशोक जी व सम्मेद जी के सहयोग से विश्व शांति व सभी के कल्याणार्थ एवं समय पर अच्छी वर्षा के लिए इंद्रध्वज मंडल विधान की पूजा के साथ ग्रीष्मकाल में समाज के बालक-बालिकाओं को धर्म की शिक्षा एवं जैन धर्म के सिद्धांत देव दर्शन पूजन विधि के लिए पं. संजय सिद्धार्थी, रितेश शास्त्री, दीपक शास्त्री, जितेन्द्र शास्त्री के साथ ही प्रिया संजय जी ने सैकड़ों बच्चों को इन सात दिनों में धर्म का पाठ पढ़ाया। 2 जून गुरूवार को इस महोत्सव का समापन होगा। प्रात: 6.30 से 7 बजे शांति जाप, 7 से 8.30 बजे तक जिनेन्द्र पूजन व अभिषेक एवं शांति यज्ञ के साथ प्रात: 8.30 बजे शहर के विभिन्न मार्गो से श्री जिनेन्द्र रथयात्रा निकाली जाएगी। प्रात: 10 से 11 बजे तक प्रवचन एवं 11 सामुहिक वात्सल्य भोज के साथ इस जैनत्व महाकुंभ का समापन होगा।
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