Thursday, 7 July 2016

महिला सरपंच,मजदूरी कर बनाया शौचालय

 संदीप सोनी | बीड़ (खंडवा)
आपने कई पंच-पार्षद पतियों और प्रतिनिधियों के गजब के ठाठ देखे होंगे। कई सरपंच भी खुद को विधायक-मंत्री से कम नहीं समझते हैं लेकिन एक महिला सरपंच ऐसी भी है, जो 140 रुपए रोज पर मजदूरी कर रही है। उन्होंने कहा- सरपंच बनने से पहले भी यही करती थी और बाद में भी यही करुंगी तो इसमें शर्म कैसी? हां, सरपंच पद की गरिमा बरकरार रखती हूं। सरपंच बनने के बाद हस्ताक्षर करना सीख गई हूं। कर्ज लेकर घर में शौचालय बनवाया ताकि गांव के अन्य लोग प्रेरित हो सके।

यह वाकिया है खंडवा के गांव शिवरिया का। यहां की सरपंच देवबाई पेशे से मजदूर है। खेतों में निंदाई करती है। बदले में 140 रुपए मजदूरी मिलती है। ढाई साल पहले जब चुनाव हुए तो गांव में चार लोग सरपंच पद के लिए खड़े हुए। देवबाई को गांव के लोगों ने जबरदस्ती खड़ा कर दिया। उनके परिवार से कोई भी राजनीतिक में नहीं था। गांव वालों ने उन पर विश्वास जताया और सवा सौ वोट से जीत गई। सरपंच बनने के बाद भी देवबाई ने अपना मूल काम नहीं छोड़ा। हालांकि बच्चों से हस्ताक्षर करना सीखा। पति चिंताराम हलवाई का काम करते हैं। देवबाई ने बताया मैंने पूर्व सरपंच से बीपीएल कार्ड बनाने के लिए कई बार निवेदन किया था लेकिन नहीं बन सका। पात्र होने के बावजूद आज भी मेरे परिवार के पास बीपीएल कार्ड नहीं है। मैं सरपंच बनी तब से किसी भी पात्र को इनकार नहीं किया। एक बार हरसूद जनपद में बैठक के लिए गई थी। उस समय मेरे घर में भी शौचालय नहीं था। सबसे पहले मैंने ही कर्ज लेकर शौचालय बनवाया। अब कोशिश कर रहे हैं कि गांव के हर घर में शौचालय हो।
सरपंच देवबाई
अब तक यह काम कराए
-समग्र स्वच्छता अभियान के तहत 70 शौचालय बनवाए।
-दो स्टापडेम तथा तीन खेत सड़क का निर्माण।
-दो वार्डों में सीसी रोड का निर्माण।
-दो आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत कराए।

देवबाई ने बताया सचिव बलवंत देवड़ा कोई भी काम करने से पहले मुझे बताते हैं। जब किसी कागज पर हस्ताक्षर करने का कहते हैं तो मैं पहले कागज किसी से भी पढ़वा लेती हूं ताकि कोई गलत काम न हो जाए।
-Source Dainik Bhaskar Khandwa