ये वही पांच साल की मोना है जो 14 साल पहले खंडवा स्टेशन पर लावारिस हालत में रोते हुए मिली थी। तब माता-पिता स्टेशन पर बिलखता छोड़ गए थे, इस कारण उसकी आंखें भीगी थीं, आज खुशी के आंसू हैं। वह इसलिए कि आज यानी शुक्रवार को उसका विवाह हरदा जिले के पोखरनी गांव के पंच कमलेश से होना है। तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पूरा शहर घराती बनेगा। इस खुशी के बीच मोना के मन में अब भी कई सवाल हैं। उसने कहा- मुझे अनाथ होने का गम नहीं है लेकिन मेरे माता-पिता मिल जाए तो उनसे जरूर पूछूंगी कि स्टेशन पर मेरा हाथ क्यों छोड़ दिया था। कोई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को भला ऐसे छोड़ते हैं क्या?
किस्मत वाली हूं जो ससुराल में भरा पूरा परिवार मिल रहा है 16 अगस्त 2002 की सुबह। एक बच्ची खंडवा के प्लेटफार्म पर बैठकर रो रही थी। तभी जीआरपी जवान रामअवतार (वर्तमान में आमला में प्रधान आरक्षक) की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने बच्ची को उठाया और गले लगा लिया। टॉफी, बिस्किट दिलाए फिर नाम पूछा। बच्ची ने रोते हुए अपना नाम मोना बताया। रामअवतार ने बच्ची को साथ लेकर उसके माता-पिता को तलाशा। सुबह से दोपहर तक हर प्लेटफार्म पर दो-दो, तीन-तीन बाद हजारों लोगों से पूछा लेकिन उसके माता-पिता, रिश्तेदार का कही पता नहीं चला। मोना अपने माता-पिता का नाम भी नहीं बता पाई। अखिरकार उन्होंने जीरआरपी थाने पहुंचकर पंचनामा बनाया। अफसरों से हस्ताक्षर कराए और मोना को लेकर हिंदू बाल सेवा सदन पहुंच गए। यहां बच्ची को भर्ती करा दिया। वक्त बीता, मोना यहीं रहकर पढ़ाई करने लगी। रामअवतार महीने में एक-दो बार मोना से मिलने आ जाते थे, फिर उनका तबादला हो गया, वे शहर छोड़कर चले गए। मोना को आश्रम में दूसरे अनाथ बच्चे मिल गए। उन्हीं के साथ वह बड़ी होने लगी। अब 14 साल बीत गए। 8 जुलाई को सुबह 8 बजे मोना को ब्याहने कमलेश चौधरी बरात लेकर आएंगे। कमलेश का हरदा में ई-रिक्शा का शोरूम है। उन्होंने संकल्प लिया था कि अनाथ लड़की से ही शादी करेंगे। गुरुवार को अनाथ आश्रम में शादी की तैयारियां तेज हो गई थीं। मोना को हल्दी, मेहंदी लगाई जा रही है। महिला संगीत का दौर जारी है। मोना ने बीती जिंद गी को लेकर एक ही बात कही अनाथ होने का कारण मुझे पता नहीं चल सका, इसका दुख हमेशा रहेगा। भगवान किसी लड़की को मेरी तरह अनाथ नहीं करें। उसने कहा- किस्मत वाली हूं जो मुझे ससुराल में भरा पूरा परिवार मिल रहा है। कभी किसी को अपनी तरफ से शिकायत का मौका नहीं दूंगी। -Source Dainik Bhaskar Khandwa |