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पायल की ज़िंदगी दो बार 'कांटों' में उलझने के बाद अब मौसी के आसरे
सदाकत पठान | खंडवा
एक बच्ची जिसे जन्म के बाद मां ने कांटों में फेंक दिया, मरने के लिए...। तलाकशुदा नर्स दूसरी मां बनी। आठ साल तक पाल पोसकर बड़ा किया। अच्छे स्कूल में एडमिशन करवाया। अचानक एक दिन नर्स के प्रेमी ने सुपारी देकर उसे मरवा दिया। इस मासूम बच्ची को कांटों से पटी खंती में फेंक दिया, फिर वापस मरने के लिए...। तड़पने के लिए, लेकिन यह बच्ची मरी नहीं, जिंदा रही, पुलिस को बुलाया, हत्यारों का हुलिया बताया, गिरफ्तार कराया। अब इन्हें कोर्ट ने 24 जून 2016 को इसी बेटी की गवाही पर उम्रकैद की सजा सुनाई है।
पढ़िए, 11 साल की इस मासूम की कहानी, उसी की जुबानी -
मैं पायल अब 11 साल की हो गई हूं। इन सालों में दो बार मेरी जिंदगी कांटों में उलझी। पहली बार जब मैं एक दिन की थी तब और दूसरी बार जब 8 साल की थी। मुझे याद तो नहीं पर सब बताते हैं कि जब मैं एक दिन की थी (9 अगस्त 2005) तब मोरटक्का के खेड़ीघाट के पास कांटों की झांड़ियों में फेंक दिया था, खुद मेरी मां ने। वह कौन थी किसी को नहीं पता। दोपहर 3.45 बजे मुझे गंभीर हालत में जिला अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में भर्ती किया। शरीर पर कांटे लगे थे, जगह-जगह चींटियों ने कांट लिया था। मैं भूख से तड़प रही थी, नर्स ट्रेजा पारे की ममता जाग उठी। उन्होंने चम्मच से दूध पिलाया, इलाज किया। वे तलाकशुदा थी, उनकी बेटी की मौत हो चुकी थी। मैं 11 महीने अस्पताल में रही। इस दौरान ट्रेजा पारे मुझे दत्तक पुत्री बनाने के लिए कानूनी अर्जियां लगाती रही। आखिर कोर्ट ने सुनी और 17 जुलाई 2006 को मुझे दूसरी मां मिल गई।
मां के आंचल में मैंने हंसना-बोलना सीखा। बड़ी हुई तो शहर के सबसे अच्छे स्कूल में भर्ती कराया। मैं रोज स्कूल जाती थी। मां से मिलने हेमंत शर्मा आता था, मुझे वो अच्छा नहीं लगता था लेकिन मां कहती थी जैसे तुम मुझे प्यारी हो वैसे ही वे भी। वक्त बीता और मैं 8 साल की हो गई। इधर, हेमंत का पैसा को लालच बढ़ता गया। वह मां से बार-बार पैसा मांगता। मां और हेमंत के बीच लड़ाई होने लगी। मां ने हेमंत को दिए सात लाख रुपए मांगे। बोलेरो वाहन, बाइक छीन ली। इससे हेमंत बहुत गुस्सा हुआ। उसने मां की हत्या के लिए किशोर जाधव को डेढ़ लाख रुपए में सुपारी दे दी। किशोर हमारी कार किराए पर चलाता था। 27 सितंबर 2013 की शाम किशोर आया, मां से बोला- आपको बाबा के पास चलना था न, चलिए। मां मुझे लेकर कार में बैठ गई। उसके साथ एक व्यक्ति नवनीत सुले भी था। रात हो गई थी, वह हमें मूंदी रोड की सुनसान जगह पर ले गया। गाड़ी रोकी और मां का गला दबाने लगे। मां तड़प रही थी। शेष|पेज 2 पर
मैंने बचाने की कोशिश की तो मेरा भी गला दबा दिया। मैं बेहोश हो गई, जब होश आया तो देखा उन्होंने मुझे खंती में फेंक दिया है, मेरे पूरे बदन में कांटे चुभ रहे थे। मैंने खंती से झांककर देखा तो मां बीच सड़क पर पड़ी थी, किशोर उनके ऊपर बार-बार कार चढ़ा रहा था। कुछ देर बाद वे चले गए। मां लहूलुहान थी, मैं जैसे-तैसे खंती से बाहर निकली। जाकर मां से लिपट गई। उन्हें उठाया लेकिन वे नहीं उठीं। पास में मां का मोबाइल पड़ा था, मैंने 100 नंबर डॉयल कर पुलिस को बताया। थोड़ी देर में पुलिस वाले आ गए। उन्होंने मुझे और मां को अस्पताल पहुंचाया। सुबह पता चला कि मां मर गई है। मैं एक बार फिर अनाथ हो गई। मैंने पुलिस वालों को बताया कि कैसे उन्होंने मां को मारा। सभी का हुलिया भी बता दिया। मां का प्रेमी हेमंत, ड्राइवर किशोर और उसका साथी नवनीत भाग गए। मुझे भी जान का खतरा था, पुलिस सुरक्षा में रहना पड़ा। स्कूल भी छूट गया। अनाथ आश्रम में रही। बार-बार पुलिस वालों से पूछती मां के कातिलों को कब पकड़ेंगे, वे चुप रहते। एक दिन वो तीनों पकड़ा गए। मैंने थाने पहुंचकर उनकी पहचान की, बताया- ये ही मेरी मां के हत्यारे हैंं। कोर्ट में केस चला। मैंने जज साहब को भी सारी घटना बताई। ढाई साल बीत गए। आखिर वह दिन (24 जून 2016) आ गया जिसका मुझे इंतजार था। मेरी मं के तीनों कालितों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। फैसला सुन मैं रो पड़ी, मां की याद आ गई। अब मैं मौसी मधु दवे के साथ रहती हूं लेकिन जिंदगी में मां की कमी हमेशा रहेगी।
Source- Dainik Bhaskar Khandwa
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