भास्कर संवाददाता | हरसूद
इंदिरा सागर बांध परियोजना अंतर्गत 30 जून 2004 को मानव निर्मित त्रासदी का शिकार हुए 22 हजार की आबादी के शहर हरसूद की 12वीं बरसी पर यहां पसरा सन्नाटा मित्र मंच 72 की आहट से टूटा। हरसूद के इन 13 मित्रों का यह समूह 1972 में मैट्रिक क्लास का बैच रहा है। हरदा, हरसूद, खिरकिया, खंडवा सहित अन्य स्थानों से भी पुराने हरसूद आने का सिलसिला चलता रहा। हरसूद के विस्थापितों ने यहां पहुंचकर मकान, दुकान, मोहल्लों में घूमकर अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। खंडहर और मलबे में अपनी मातृ और कर्मभूमि को तलाश कर नमन भी किया। पुरानी यादों की बातों में यह साथी ऐसे खोए कि तीन घंटे कब बीत गए पता ही नहीं चला।
सपरिवार पहुंचा था मित्र मंच : हरसूद में प्रतिभा सम्मान के लिए तैयार हुए मित्र मंच 72 के सदस्यों में सुभाष मेहता, रघुवीर शर्मा, पूनमचंद शर्मा, मनोहर अग्रवाल, रवि खमेले, सतीश सकरगाए, पुरुषोत्तम पटेल, सुरेश नामदेव, रामकृष्ण सोनी, गेंदालाल डोडे, दिनेश खेड़े अपनी धर्म पत्नी क्रमश: प्रतिभा मेहता, निशा शर्मा, प्रमिला शर्मा, संतोष अग्रवाल, सुनीता खमेले, उषा किरण सकरगाए, सुंदरदेवी पटेल, मालती नामदेव, माला सोनी तथा किरण खेड़े के साथ विस्थापन के 12 साल बाद पहली बार पुराने हरसूद पहुंचे। एकसाथ 20-25 लोगों की आहट से पसरा सन्नाटा दूर हो गया। वीरान हरसूद में आवाजें गूंजने लगी। किसीे ने कहा यहां हमारी दुकान थी, कोई बोला यहां सभा होती थी तो किसी ने कहा डोलग्यारस पर्व का आनंद कुछ और ही था। इस तरह पुरानी बातो में मशगूल होकर घूमते हुए खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना कर प्रसादी ग्रहण की।
हमेशा आएंगे, सक्रिय होगा मंच
घूमने-फिरने, दर्शन-प्रसादी के बाद मित्र मंच 72 के सभी सदस्यों ने विचार-विमर्श किया। मंच के सुभाष मेहता व सतीश सकरगाए ने बताया अब हम हर साल 30 जून को यहां आएंगे। मित्र मंच 72 पुन: अपनी गतिविधियां प्रारंभ करने के लिए सक्रिय होगा। मंच पुराने हरसूद में हर साल प्रतिमा सम्मान समारोह आयोजित करता था।
आते रहे हरसूद के विस्थापित
हरसूद की बरसी पर मातृभूमि को नमन करने और यादें ताजा करने के लिए विस्थापितों की आवाजाही दिनभर जारी रही। अनुराग बंसल, दीपक सोनी, चंद्रकांत सांड, अनिल माहेश्वरी सहित दिनभर में लगभग 200 लोग पुराने हरसूद पहुंचे। विस्थापितों ने सांई बाबा और हनुमानजी से हरसूद के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पर्यटन विकास के लिए जरूरी है अभियान
पुराने रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर सरपंच नंदू राठौर, गोकुल मीणा, अशोक मीणा, संतोष यादव सहित 50 से अधिक ग्रामीणों ने डूब से कटे गांवों को मुख्य धारा से जोडऩे तथा पर्यटन केंद्र की दृष्टि से पुराने रेलवे ट्रैक को पिपलानी स्टेशन तक ऊंचा उठाकर एप्रोच रोड बनाए जाने की मांग को अमली जामा पहनाने का संकल्प मानव शृंखला बनाकर लिया।
-Source Dainik Bhaskar Khandwa
इंदिरा सागर बांध परियोजना अंतर्गत 30 जून 2004 को मानव निर्मित त्रासदी का शिकार हुए 22 हजार की आबादी के शहर हरसूद की 12वीं बरसी पर यहां पसरा सन्नाटा मित्र मंच 72 की आहट से टूटा। हरसूद के इन 13 मित्रों का यह समूह 1972 में मैट्रिक क्लास का बैच रहा है। हरदा, हरसूद, खिरकिया, खंडवा सहित अन्य स्थानों से भी पुराने हरसूद आने का सिलसिला चलता रहा। हरसूद के विस्थापितों ने यहां पहुंचकर मकान, दुकान, मोहल्लों में घूमकर अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। खंडहर और मलबे में अपनी मातृ और कर्मभूमि को तलाश कर नमन भी किया। पुरानी यादों की बातों में यह साथी ऐसे खोए कि तीन घंटे कब बीत गए पता ही नहीं चला।
सपरिवार पहुंचा था मित्र मंच : हरसूद में प्रतिभा सम्मान के लिए तैयार हुए मित्र मंच 72 के सदस्यों में सुभाष मेहता, रघुवीर शर्मा, पूनमचंद शर्मा, मनोहर अग्रवाल, रवि खमेले, सतीश सकरगाए, पुरुषोत्तम पटेल, सुरेश नामदेव, रामकृष्ण सोनी, गेंदालाल डोडे, दिनेश खेड़े अपनी धर्म पत्नी क्रमश: प्रतिभा मेहता, निशा शर्मा, प्रमिला शर्मा, संतोष अग्रवाल, सुनीता खमेले, उषा किरण सकरगाए, सुंदरदेवी पटेल, मालती नामदेव, माला सोनी तथा किरण खेड़े के साथ विस्थापन के 12 साल बाद पहली बार पुराने हरसूद पहुंचे। एकसाथ 20-25 लोगों की आहट से पसरा सन्नाटा दूर हो गया। वीरान हरसूद में आवाजें गूंजने लगी। किसीे ने कहा यहां हमारी दुकान थी, कोई बोला यहां सभा होती थी तो किसी ने कहा डोलग्यारस पर्व का आनंद कुछ और ही था। इस तरह पुरानी बातो में मशगूल होकर घूमते हुए खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां पूजा-अर्चना कर प्रसादी ग्रहण की।
हमेशा आएंगे, सक्रिय होगा मंच
घूमने-फिरने, दर्शन-प्रसादी के बाद मित्र मंच 72 के सभी सदस्यों ने विचार-विमर्श किया। मंच के सुभाष मेहता व सतीश सकरगाए ने बताया अब हम हर साल 30 जून को यहां आएंगे। मित्र मंच 72 पुन: अपनी गतिविधियां प्रारंभ करने के लिए सक्रिय होगा। मंच पुराने हरसूद में हर साल प्रतिमा सम्मान समारोह आयोजित करता था।
आते रहे हरसूद के विस्थापित
हरसूद की बरसी पर मातृभूमि को नमन करने और यादें ताजा करने के लिए विस्थापितों की आवाजाही दिनभर जारी रही। अनुराग बंसल, दीपक सोनी, चंद्रकांत सांड, अनिल माहेश्वरी सहित दिनभर में लगभग 200 लोग पुराने हरसूद पहुंचे। विस्थापितों ने सांई बाबा और हनुमानजी से हरसूद के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पर्यटन विकास के लिए जरूरी है अभियान
पुराने रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर सरपंच नंदू राठौर, गोकुल मीणा, अशोक मीणा, संतोष यादव सहित 50 से अधिक ग्रामीणों ने डूब से कटे गांवों को मुख्य धारा से जोडऩे तथा पर्यटन केंद्र की दृष्टि से पुराने रेलवे ट्रैक को पिपलानी स्टेशन तक ऊंचा उठाकर एप्रोच रोड बनाए जाने की मांग को अमली जामा पहनाने का संकल्प मानव शृंखला बनाकर लिया।
-Source Dainik Bhaskar Khandwa