खंडवा। 75 वर्षीय
वृद्धा महिला को किसी अज्ञात वाहन चालक ने टक्कर मार दी थी। वृद्धा को घायल
हालत में जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जिला अस्पताल में तीन दिनों तक उपचार
के बाद निधन हो गया। परिजन नहीं खोजे जा सके। इसी तरह एक नवजात का शव भी
क्षत-विक्षत मिला था। इनका अंतिम संस्कार समाजसेवी संस्था ने किया।
इस संस्था ने हजारों से ज्यादा अंतिम संस्कार उनके किए हैं, जिन्हें वे जानते तक नहीं। लेकिन इन दोनों के अंतिम संस्कार के समय संस्था के लोगों की भी आँखें भर आईं। कारण, ऐसी अनोखी अंतिम यात्रा उन्होंने भी कभी नहीं देखी। जिसमें दुनिया में 75 साल बिताने वाली को अंतिम समय में परिजन नहीं मिले। उधर, नवजात को दुनिया दिखाने से पहले अपनों ने ही इस तरह अलविदा कह दिया।
समाजसेवी व संस्था सदस्य सुनील जैन ने बताया कि नवजात के हत्यारों को तो पुलिस नहीं खोज पाई। वृद्धा के परिजन भी नहीं मिले। वह इतनी गंभीर थी कि परिजनों के नाम या खुद का ठिकाना नहीं बता पाई। मोघट थाना पुलिस मर्ग कायम कर महिला के परिजनों को ढूंढने के प्रयास किए। 17 मार्च को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। बाद में इसे निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के सुपुर्द कर दिया। वृद्धा का संस्था ने हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया।
वहीं, एक अप्रिय घटना 16 मार्च को घटित हुई, जिसमें अज्ञात महिला ने पुत्री को जन्म देकर जिला अस्तपाल की सुराही के पास छोड़ दिया। जानवरों ने नोंच कर क्षत-विक्षिप्त कर दिया था इस नवजात अज्ञात बालिका भी 17 मार्च को पोस्टमार्टम कर पुलिस ने दोनों शवों को पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के सुपुर्द किया।
समिति के सदस्य आशीष चटकेले, मुबारिक पटेल, भूपेन्द्रसिंह चौहान, सुनील जैन, सुरेन्द्र सोलंकी, भानुभाई पटेल, संजय दुबे, विनय नेगी, प्रवीण पांडे, मंगलेश तोमर, कैलाश पटेल, बबलू, प्रदीप लाड़ व अन्य सदस्यों ने वृद्ध महिला एवं नवजात बालिका का अंतिम संस्कार राजा हरिचंद मुक्तिधाम पर किया। सदस्यों ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी।
इस संस्था ने हजारों से ज्यादा अंतिम संस्कार उनके किए हैं, जिन्हें वे जानते तक नहीं। लेकिन इन दोनों के अंतिम संस्कार के समय संस्था के लोगों की भी आँखें भर आईं। कारण, ऐसी अनोखी अंतिम यात्रा उन्होंने भी कभी नहीं देखी। जिसमें दुनिया में 75 साल बिताने वाली को अंतिम समय में परिजन नहीं मिले। उधर, नवजात को दुनिया दिखाने से पहले अपनों ने ही इस तरह अलविदा कह दिया।
समाजसेवी व संस्था सदस्य सुनील जैन ने बताया कि नवजात के हत्यारों को तो पुलिस नहीं खोज पाई। वृद्धा के परिजन भी नहीं मिले। वह इतनी गंभीर थी कि परिजनों के नाम या खुद का ठिकाना नहीं बता पाई। मोघट थाना पुलिस मर्ग कायम कर महिला के परिजनों को ढूंढने के प्रयास किए। 17 मार्च को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। बाद में इसे निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के सुपुर्द कर दिया। वृद्धा का संस्था ने हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया।
वहीं, एक अप्रिय घटना 16 मार्च को घटित हुई, जिसमें अज्ञात महिला ने पुत्री को जन्म देकर जिला अस्तपाल की सुराही के पास छोड़ दिया। जानवरों ने नोंच कर क्षत-विक्षिप्त कर दिया था इस नवजात अज्ञात बालिका भी 17 मार्च को पोस्टमार्टम कर पुलिस ने दोनों शवों को पूर्व निमाड़ सामाजिक सांस्कृतिक सेवा समिति के सुपुर्द किया।
समिति के सदस्य आशीष चटकेले, मुबारिक पटेल, भूपेन्द्रसिंह चौहान, सुनील जैन, सुरेन्द्र सोलंकी, भानुभाई पटेल, संजय दुबे, विनय नेगी, प्रवीण पांडे, मंगलेश तोमर, कैलाश पटेल, बबलू, प्रदीप लाड़ व अन्य सदस्यों ने वृद्ध महिला एवं नवजात बालिका का अंतिम संस्कार राजा हरिचंद मुक्तिधाम पर किया। सदस्यों ने मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि दी।