अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी ने कहा किसानों और निर्धन तबके की सिंहस्थ में संत सेवा करेंगे
खंडवा। उज्जैन का सिंहस्थ आधुनिक व परंपराओं से हटकर होगा। युवा वर्ग को आकर्षित कर उनमें संस्कार भरे जाएंगे। साधु संतों की सेवा नहीं, बल्कि साधु संत उस किसान व निर्धन की सेवा करते नजर आएंगे, जो गृहस्थी माथे पर रखकर कुंभ में आया है। मध्यप्रदेश सरकार के इंतजाम अच्छे हैं। संत, लोगों को आध्यात्म से जोड़ेंगे। आध्यात्म व संस्कृति में भारत विश्व गुरू है। इसी थीम पर युवाओं को चलाने के प्रयास कुंभ में करेंगे। अभी तक वृद्ध व अधेड़ों के लिए ही कुंभ माना जाता था। इस मिथक को तोड़ा जाएगा।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरी महाराज इलाहाबाद जाने के लिए दादाजी की नगरी खंडवा पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि संत समाज भी हाईटेक है। उनके विचारों को युवाओं तक लिंकअप करने का सिंहस्थ सबसे अच्छा माध्यम है। युवा देश में सर्वाधिक हैं। वे राष्ट्रनिर्माता बनें। भटकाव के रास्ते पर न चलकर आधुनिक व वैज्ञानिक आधारों पर परंपराओं का निर्वहन करें। माता-पिता व गुरू को श्रेष्ठ मानें। यही सब कुंभ का मुख्य उद्देश्य रहेगा।
समाजसेवी सुनील जैन के मुताबिक, नरेंद्र गिरी ने साफ कहा कि संत कभी सेवा के लालच में नहीं रहते। कुंभ में उस अंतिम छोर के व्यक्ति की जरूरतों व सहुलियतों का ध्यान रखा जाएगा जो उसके लिए आवश्यक है। संत ही गरीब, किसान की सेवा में तत्पर दिखेंगे। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से किसी भी तरह की नाराजगी से इंकार किया। सरकार ने जो प्रयास किए वे काफी उत्कृ ष्ठ हैं। क्षिप्रा में पानी की किसी तरह की कमी नहीं है। नर्मदा से पानी अब भी लाया जा रहा है।
पहले शाही स्नान की तैयारियाँ व पानी पर्याप्त हैं। कमी अगर थोड़ी बहुत रहती भी हैं, तो इसे संत तप समझकर भुला देंगे। वे सिंहस्थ के कुंभ में सहयोगी की भूमिका में रहेंगे। इंतजाम सरकार के होंगे, परंतु आयोजन तो संतों का ही है।
गिरीजी महाराज ने कहा कि सिंहस्थ में पांच करोड़ श्रद्धालु पहुंचेंगे। इसमें से लगभग आधे ओंकारेश्वर भी आएंगे। खंडवा मुख्य रेल स्टेशन होने के कारण यहाँ भी सरकार को इंतजाम के लिए लिखा गया था। किसी भी तरह की अव्यवस्था या गड़बड़ी इसलिए नहीं होगी क्योंकि संत समाज खुद को आयोजक मानकर काम भी कर रहे हैं। यदि छोटी गलतियाँ प्रशासनिक स्तर पर होंगी, तो सूचना देकर तुरंत सुधरवाया जाएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के साथ ही उज्जैन के प्रभारी मंत्री भूपेन्द्रसिंह की भी तारीफ की जो हर गतिविधियों पर नजर रख सारे इंतजाम करने में लगे हैं। साथ ही संतों के साथ भी उनका तालमेल अच्छा है। अभी तक तो सब कुछ ठीक चल रहा है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि नरेन्द्र गिरी जी महाराज ने उज्जैन सिंहस्थ में शुक्रवार को ध्वजारोहण किया एवं शनिवार को वे दोपहर 2.30 बजे खंडवा पहुंचे जहां स्टेशन पर उनकी अगवानी एसडीएम शाश्वत शर्मा, सीएसपी शेषनारायण तिवारी, सुनील जैन, डा. जगदीशचंद्र चौरे, आशीष चटकेले, स्टेशन मास्टर आलोक चौरे, सुनील गुप्ता, थाना प्रभारी दिलीप पुरी, भानुभाई पटेल, मंगलेश तोमर, डा. आरएस पटेल समेत कई लोगों ने मालाएं पहनाकर गिरीजी का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
खंडवा। उज्जैन का सिंहस्थ आधुनिक व परंपराओं से हटकर होगा। युवा वर्ग को आकर्षित कर उनमें संस्कार भरे जाएंगे। साधु संतों की सेवा नहीं, बल्कि साधु संत उस किसान व निर्धन की सेवा करते नजर आएंगे, जो गृहस्थी माथे पर रखकर कुंभ में आया है। मध्यप्रदेश सरकार के इंतजाम अच्छे हैं। संत, लोगों को आध्यात्म से जोड़ेंगे। आध्यात्म व संस्कृति में भारत विश्व गुरू है। इसी थीम पर युवाओं को चलाने के प्रयास कुंभ में करेंगे। अभी तक वृद्ध व अधेड़ों के लिए ही कुंभ माना जाता था। इस मिथक को तोड़ा जाएगा।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष व निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरी महाराज इलाहाबाद जाने के लिए दादाजी की नगरी खंडवा पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि संत समाज भी हाईटेक है। उनके विचारों को युवाओं तक लिंकअप करने का सिंहस्थ सबसे अच्छा माध्यम है। युवा देश में सर्वाधिक हैं। वे राष्ट्रनिर्माता बनें। भटकाव के रास्ते पर न चलकर आधुनिक व वैज्ञानिक आधारों पर परंपराओं का निर्वहन करें। माता-पिता व गुरू को श्रेष्ठ मानें। यही सब कुंभ का मुख्य उद्देश्य रहेगा।
समाजसेवी सुनील जैन के मुताबिक, नरेंद्र गिरी ने साफ कहा कि संत कभी सेवा के लालच में नहीं रहते। कुंभ में उस अंतिम छोर के व्यक्ति की जरूरतों व सहुलियतों का ध्यान रखा जाएगा जो उसके लिए आवश्यक है। संत ही गरीब, किसान की सेवा में तत्पर दिखेंगे। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार से किसी भी तरह की नाराजगी से इंकार किया। सरकार ने जो प्रयास किए वे काफी उत्कृ ष्ठ हैं। क्षिप्रा में पानी की किसी तरह की कमी नहीं है। नर्मदा से पानी अब भी लाया जा रहा है।
पहले शाही स्नान की तैयारियाँ व पानी पर्याप्त हैं। कमी अगर थोड़ी बहुत रहती भी हैं, तो इसे संत तप समझकर भुला देंगे। वे सिंहस्थ के कुंभ में सहयोगी की भूमिका में रहेंगे। इंतजाम सरकार के होंगे, परंतु आयोजन तो संतों का ही है।
गिरीजी महाराज ने कहा कि सिंहस्थ में पांच करोड़ श्रद्धालु पहुंचेंगे। इसमें से लगभग आधे ओंकारेश्वर भी आएंगे। खंडवा मुख्य रेल स्टेशन होने के कारण यहाँ भी सरकार को इंतजाम के लिए लिखा गया था। किसी भी तरह की अव्यवस्था या गड़बड़ी इसलिए नहीं होगी क्योंकि संत समाज खुद को आयोजक मानकर काम भी कर रहे हैं। यदि छोटी गलतियाँ प्रशासनिक स्तर पर होंगी, तो सूचना देकर तुरंत सुधरवाया जाएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के साथ ही उज्जैन के प्रभारी मंत्री भूपेन्द्रसिंह की भी तारीफ की जो हर गतिविधियों पर नजर रख सारे इंतजाम करने में लगे हैं। साथ ही संतों के साथ भी उनका तालमेल अच्छा है। अभी तक तो सब कुछ ठीक चल रहा है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि नरेन्द्र गिरी जी महाराज ने उज्जैन सिंहस्थ में शुक्रवार को ध्वजारोहण किया एवं शनिवार को वे दोपहर 2.30 बजे खंडवा पहुंचे जहां स्टेशन पर उनकी अगवानी एसडीएम शाश्वत शर्मा, सीएसपी शेषनारायण तिवारी, सुनील जैन, डा. जगदीशचंद्र चौरे, आशीष चटकेले, स्टेशन मास्टर आलोक चौरे, सुनील गुप्ता, थाना प्रभारी दिलीप पुरी, भानुभाई पटेल, मंगलेश तोमर, डा. आरएस पटेल समेत कई लोगों ने मालाएं पहनाकर गिरीजी का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।